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तुम एक गोबर के भृंग के समान सुरंग
की रक्षा कर रहे थे मैं तुम्हें उस गेंद को लुढ़कने नहीं दूँगा
मेरे दाँत में उठता हुआ भयकंर दर्द तुम्हें क्यों जाना
था आपसी सद्भावना की रेचक मुक्ति के बाद?
दिल में एक पत्थर डैनों पर बर्फ
एक नीले ग्रीष्म के
लड़खड़ाते प्रवेश के समय
तुम एक मौन
शिकार बन जाते हो
मैं अपनी हार स्वीकार कर लेता हूँ
उन पाषाणों से
जो मेरी प्रज्ञा पर
गिर रहे थे
रोज़वुड को कार्बन का डर
सता रहा था
झुटपुटे में अधर्म्य प्रेम को
होंठों की छाया में
मन्द चाँदनी में विस्थापित
हम लोग मलिन सम्प्रेषण की बात करते रहे
जो शोषित जीवन के क्रोधित एकालापों
के बीच चल रहे थे
जादू टोना उद्यान के रहस्यों,
स्मृतियों की शाखाओं को खोल नहीं सका था
अलग थलग रहने का खालीपन
डैनों को मुक्त करने की इच्छा,
मैं की परछाई बिना हाड़ माँस के
शब्दों के विशाल मौन को
चीरने फाड़ने की लालसा, द्वैत के समक्ष पैर भारी,
अलौतिक परन्तु समाधान और गहरे आक्रोश
के बीच तनाव की प्रतिध्वनि, अंकुरित
सोती हुई जीन भी आँखों में सुइयाँ लिये
धमाके से गिरने के बाद सबक सीखती हैं
एक निष्कपट घर भी एक अशीर्वाद का
असर धूमिल होने के बाद मिटने की सोचता है
एक विधर्मी की विरासत फिर भी जीती है
अपने साथ एक दर्पण, भंजित फटे जुए जोड़ों को लेकर
एक एपीड्यूरल इन्जेक्शन के समान था
खामोशी के सूखे टुकड़े नीचे उतर रहे थे
एक मृतजात बालक के समान रूधिर के गोले
से सूर्य का सिर तड़ाक से बाहर निकल आया था
पर्वत में कुछ अपराध बोध की भावना झलक
रही थी इसने अपना मूड़ बदल लिया
एक एपीड्यूरल इन्जेक्शन के समान था
खामोशी के सूखे टुकड़े नीचे उतर रहे थे
एक मृतजात बालक के समान रूधिर के गोले
से सूर्य का सिर तड़ाक से बाहर निकल आया था
पर्वत में कुछ अपराध बोध की भावना झलक
रही थी इसने अपना मूड़ बदल लिया
यह एक शहर के साथ हुआ बलात्कार था कर लो
जो तुम चाहते हो परन्तु मैं तो अब भी
पुरानी शैली में अपनी बात करूँगा
पीठ के दर्द के साथ
और मौन को एक फूले हुए
दिल के खूबसूरत खालीपन में
उड़ने दूँगा
गुमनामी की खातिर
मैं अपने नाम को
लक्षणों से कोई शिष्ट बात नज़र नहीं आ रही थी
देवताओं के अपवित्रीकृत बिस्तरों की गाथा
नीचे बह कर आ गई थी
एक काले चाँद का मद्धम बिम्ब
खिड़की पर चढ़ रहा था और
प्रत्येक घर ने अपना एक बेटा सौंप दिया था