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आसु का लेप्

द्वारा अनिल्
लेखक/लेखिका 03/05/2008 - 13:13

हर शाम पलको तक उजाले आते है
चान्द घिस के चन्दन लगाने आते है

करवत(karvat) बीच नीन्द के फसी रहती है आजकल
ख्वाबो के आजकल कहा सिरहाने आते है

खुश्बु उथार(UTHAR)कि थी हवा मे उचाल(UCHHAL) दी
यादो के दौर मे भी क्या दोहराने आते है

खुश्क लबो से चिपकता आन्सु क लेप है
अहसान करने कैसे ये पैमने(PAIMANE) आते है


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