मीथे आसु

meethe aansu
फक्त नीन्द मे जगा हू
एक खयाल से ख्वाब को जीन्द्गी देकर
बहुत चुभ रहा है पल्को मै
बन्द आखो से बर्सने को है सुकून बेहीसाब

अभी कतोरा भरा नही है
भरेगा तभी छल्केगा
सुकून अभी कहा है

अभी कल का हीसाब देना है
उस खयाल का जीसे जीन्द्गी दी थी कल
बहुत बेलगम सा था
बोल तुझे रीहा कराता हू
रूह अभी छुराता हू
बहुत नमकीन जगह रखा है मुझे
मेरे अश्को को शहद की रीश्वत देकर चला गया वो

मीथे आसु आते है अब
सुकून मीथा हो चल है

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