| कविता | *मखमली वापिसी | Satish Verma |
| कविता | समकालीन | Satish Verma |
| कविता | पत्तियाँ | Satish Verma |
| कविता | *अनावृत और पीड़ा भरा | Satish Verma |
| कविता | त्रिक | Satish Verma |
| कविता | शैल और कपाल | Satish Verma |
| कविता | शैल और कपाल | Satish Verma |
| कविता | सफेद घर | Satish Verma |
| कविता | जल-प्रलय का शोक मनाते हुए | Satish Verma |
| कविता | एक बार | Satish Verma |
| कविता | कहीं नहीं जाना | Satish Verma |
| कविता | *जवाब देने का वक्त | Satish Verma |
| कविता | ऐसे हुआ | Satish Verma |
| कविता | भूख और पलायन के बीच | Satish Verma |
| कविता | छोटी सच्चाइयाँ | Satish Verma |
| कविता | उत्तोलन | Satish Verma |
| कविता | ओस की बूँद | Satish Verma |
| कविता | स्त्रवण | Satish Verma |
| कविता | मितव्ययिता | Satish Verma |
| कविता | रिक्त होना | Satish Verma |
| कविता | बिम्ब | Satish Verma |
| कविता | अन्धे झूले | Satish Verma |
| कविता | छत द्वारा सीमित | Satish Verma |
| कविता | दर्पण मेँ देखती बिम्बोँ का इन्द्रजाल् -सुश्री शिवेश शक्तिदिव्या[ दुर्गाश्री प्रियान्शी] | शिवेशशक्तिदिव्या |
| कविता | आस्था के गीत बिखरने दो गणतंत्र के अभिनंदन में! -सुश्री शिवेशशक्तिदिव्या[ दुर्गाश्री प्रियांशी] | शिवेशशक्तिदिव्या |